New Rules for Birth & Death Certificates

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के नियमों में बड़ा बदलाव आया है

          जिसका मतलब है कि अगर आप देरी से प्रमाणपत्र बनवाते हैं तो आपको कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

 

New Rules for Birth & Death Certificates

संसद में हाल ही में हुए हंगामे के बीच यह विधेयक पारित हुआ है

          मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण संसद का काम ठप रहा, लेकिन इसी बीच लोकसभा में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण विधेयक को बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया।

 

विपक्ष के प्रदर्शन से संसद की कार्यवाही ठप रही।

           प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के शांति बनाए रखने के आग्रह को अनसुना कर दिया। इसके बाद कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

 

दोपहर में जब सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई,

          तब भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग उठती रही। इसी शोर-शराबे के बीच सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण विधेयक को पारित करा दिया।

 

इस नए संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य

           जन्म और मृत्यु के समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना और देर से पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाना है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष से अधिक समय बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो पंजीकरण के लिए अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। इसका मतलब है कि अगर आप देरी से प्रमाणपत्र बनवाते हैं तो आपको कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

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